Wednesday, March 14, 2018

हृदय के अनोखे रूप

ज्वालाओं के मध्य बना यह कैसा उपवन
भ्रमित और आश्चर्यचकित है मेरा मन !

कभी मृगों के लिए स्वयं को चारागाह बना लेता
लामाओं के लिए स्वयं को बौद्धविहार बना लेता
किसी मूर्ति के लिए कभी यह पावन मंदिर बन जाता
हज़ करने वालों की खातिर यह का'बा भी बन जाता
कभी कभी तो बन जाता पावन ग्रंथों के दोहे
हृदय बदलता रहता मेरा कैसे रूप अनोखे !!

मानवता है मेरा धर्म अहो! अब इसको ही अपनाओ सभी
अजर-अमर-अविनाशी है यह, मेरा तो 'जय' विश्वास यही

मूल कविता निम्नवत है :

Wonder,
A garden among the flames!

My heart can take on any form:
A meadow for gazelles,
A cloister for monks,
For the idols, sacred ground,
Ka'ba for the circling pilgrim,
The tables of the Torah,
The scrolls of the Quran.

My creed is Love;
Wherever its caravan turns along the way,
That is my belief,
My faith.

-Ibn Arabi