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Wednesday, November 6, 2013

तुम कहती हो ..


तुम कहती हो ..

तुम कहती हो तुम बदली हो 
पर उड़ने से डरती हो,
तुम बदली तो नहीं 
तुम कहती हो तुम धरती हो 
पर भूचालों से डरती हो, 
तुम धरती तो नहीं 

तुम कहती हो तुम ही गुलाब हो 
पर काँटों से डरती हो, 
तुम गुलाब भी नहीं हुईं 
तुम कहती हो कमल तुम्ही हो 
पर कीचड से डरती हो,  
कमल-पुष्प भी नहीं हुईं 

तुम कहती हो तुम तितली हो 
पर भँवरों से डरती हो, 
तुम तितली तो नहीं 
तुम कहती हो तुम बिजली हो 
पर मेघों से डरती हो, 
तुम बिजली तो नहीं 

तुम कहती हो, तुम चन्दा हो 
पर रातों से डरती हो, 
तुम चन्दा तो नहीं
तुम कहती तो तुम सूरज हो 
पर गर्मी से डरती हो, 
तुम सूरज तो नहीं 

तुम कहती हो तुम मदिरा हो 
पर होंठों से डरती हो, 
तुम मदिरा तो नहीं 
तुम कहती हो तुम दरिया हो 
पर बहने से डरती हो, 
तुम दरिया तो नहीं  

मैं   सच   कह   दूँ   कि   तुम   क्या   हो ?
तुम देवी हो, तुम शक्ति हो, तुम सबला हो 
तुम  बेटी  हो, तुम भगिनी हो, तुम माँ हो 
तुम्ही  प्रकृति हो, तुम्ही प्रेयसी, भार्या  हो 

तुम्ही   सृष्टि  की  जन्मदात्री, तुम  ही  तो पालक  हो
तुम ज्ञान, मान-सम्मान स्रोत हो, तुम ही संहारक हो
तुम  से  है  सब  कुछ  ऐ  नारी!  तुम  ही  से  'जय'  है
तुम हँसो तो दिनकर उठ जाए, रो दो तो आयी प्रलय है

तुम कहती हो ....

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चित्र : साभार  गूगल