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Thursday, October 10, 2013

अतीत के पन्ने



जब कभी मैं पलटता हूँ अतीत के पन्ने 
कुछ रंग बिरंगी कुछ मटमैली स्मृतियाँ उभर आती हैं 
उन्हें देख कर कभी हँसता हूँ 
कभी चौंकता हूँ तो सिहर जाता हूँ कभी
कोरी कल्पनाओं की उड़ाने बहुत भाती हैं 

जब कभी मैं पलटता हूँ अतीत के पन्ने 
जिनमे मुक्त हास्य और दुखद अनुभव छपे होते हैं
की गयी भूलों का प्रायश्चित नज़र आता है 
कुछ ऐसे कार्य भी हैं जो छोटे बड़े धब्बों को धोते हैं

भीनी भीनी यादों में मन खोया खोया रहता है 
अपनी लम्बी लम्बी बाजुओं से 
इसे जोर से जकड़ लेती हैं 
बेबस सा मन बुझी बुझी आँखों से 
देखता ही रहता है और उसे तड़पने के लिए  
अपनी ओर आकर्षित सा कर लेती हैं 

फिर जान नहीं  पाता हूँ कि मन भाव शून्य हो गया कब 
और बंद हो गये कब अतीत के वे पन्ने ...