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Monday, October 21, 2013

करवा-चौथ (दो - चित्र)




(१ )

मेरे सुनहरे सपनों को , अब एक साथी मिल गया
मादक उमंगो की लहर का, एक माझी मिल गया
उँगली में मुँदरी डाल कर , 'जय' कहाँ पर खो गए
आज मेरे मन का आँगन,पुष्प-वन सा खिल गया


(२)

स्मृतियों में सघन बसी हो, हे परिणीते!
आप  बिना  'जय' अंतर-मन हैं रीते रीते
हिरणी  सी  भर उच्च कुलाँचे आ जाओ
या  साथ पवन के आओ मेरे जीते जीते