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Wednesday, February 24, 2010

मुझे लगा तुम आ जाओगी

मुझे लगा तुम आ जाओगी
मेरे सर को सहलाओगी
आज अगर तुम यहाँ पे होती
मुझको सीने से चिपटाती
बैठे बैठे हर पल रोती
रह रह कर तुम गले लगाती
चारो ओर सगे संबंधी
सास श्वसुर देवर और ननदी
कैसे खुद को समझोगी
मुझे लगा तुम आ जाओगी
याद आ रहे मधुरिम पल वो
महामिलन के अनुपम क्षण वो
प्रणयवद्ध जब मिले थे दोनों
रक्तिम स्वेदज रज के कण वो
मदिर मदिर वो कई महीने
ली हैं बलैया आज सभी ने
भरद्वाज नव जन्माओगी
मुझे लगा तुम आ जाओगी
नन्हा सा वह रुई का फाहा
कम्बल में वह सोता आया
उसे दिया मेरी बाहों में
निकल पडी अंतिम राहों में
ढरक चला नैनों से पानी
पूर्ण हो गयी एक कहानी
अब जीवन भर तड़पाओगी
मुझे लगा तुम आ जाओगी
नन्हा मुन्ना गोरा चिट्टा
आज हो गया हट्टा कट्टा
अब विवाह की बात चली है
तव प्रतिरूपा बहू मिली है
मुझे तीर्थ पर जाना होगा
पातक सभी मिटाना होगा
आशा है तुम मिल जाओगी
मुझे लगा तुम आ जाओगी
तनिक दूर ही मैं चल पाया
वाहन थोड़ा डग मगाया
फिर गहरी खाई में गिर गया
सब के संग मैं भी तो मर गया
अपने शव के आस पास हूँ
थोडा विस्मित और उदास हूँ
मुझे लगा तुम आ जाओगी
मेरे सर को सहलाओगी